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Wednesday, November 30, 2011

Khatam Kare ye Prem Kahani : Funny Poetry on Love and Breakup

















मेरी प्रियतम मेरी रानी
आओ खतम करें अब अपनी प्रेम कहानी

अब नहीं ले जा सकता मैं तुम्‍हें महंगे रेस्‍टोरेंट में
अब नहीं चुका सकता तुम्‍हारी शॉपिंग का बिल
बढ़ती महंगाई और तुम्‍हारी बढ़ती डिमांड
पॉकेटमनी नहीं रही अब सप्‍लाई के काबिल
मैं कबतक चुराऊंगा पिताजी के बटुए से पैसे
और कबतक पूरा करूंगा तुम्‍हारी मनमानी
मेरी प्रियतम मेरी रानी
आओ खतम करें अब अपनी प्रेम कहानी

कहां से लाऊं मैं रोज तुम्‍हारे लिए ताजे गुलाब
'कहां हो', 'क्‍या कर रहे हो', 'क्‍यूं कर रहे हो'
जैसे सवालों के कब तक देता रहूं जवाब
कबतक अपनी सहेलियों से राखी बंधवाती रहोगी
कबतक मेरे कैरेक्‍टर पे क्‍वेश्‍चन मार्क लगाती रहोगी
तुम्‍हारे मैसेज का रिप्‍लाई करते-करते
मेरी उंगलियों की बढ़ गई है परेशानी
मेरी प्रियतम मेरी रानी
आओ खतम करें अब अपनी प्रेम कहानी

अब आंसू ना बहाओ, ना करो इमोशनली ब्‍लैकमेल
इक्‍कीसवीं सदी में प्‍यार है दिखावा, है महज खेल
ना मैं तेरा कृष्‍णा हूं, ना तू मेरी राधा है
मेरी करियर के सामने, तू सबसे बड़ी बाधा है
अब गाली देके और चिल्‍लाके
मत दिखाओ अपनी नादानी
मेरी प्रियतम मेरी रानी
आओ खतम करें अब अपनी प्रेम कहानी

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Monday, September 19, 2011

Kaka Hathrasi Funny Poetry



काका हाथरसी की कविता 'महंगाई'



जन - गण - मन के देवता , अब तो आँखें खोल
महँगाई से हो गया , जीवन डाँवाडोल
जीवन डाँवाडोल , ख़बर लो शीघ्र कृपालू
कलाकंद के भाव बिक रहे बैंगन - आलू
कहँ ‘ काका ' कवि , दूध - दही को तरसे बच्चे
आठ रुपये के किलो टमाटर , वह भी कच्चे

राशन की दुकान पर , देख भयंकर भीर
‘ क्यू ’ में धक्का मारकर , पहुँच गये बलवीर
पहुँच गये बलवीर , ले लिया नंबर पहिला
खड़े रह गये निर्बल , बू ढ़े , बच्चे , महिला
कहँ ‘ काका ' कवि , करके बंद धरम का काँटा
लाला बोले - भागो , खत्म हो गया आटा

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